दिल की धड़कन रुके तो CPR से बच सकती है जान, यहां 5 हजार लोगों को ट्रेनिंग दे चुके डॉक्टर


कमल पिमोली/ श्रीनगर गढ़वाल.अचानक कार्डियक अरेस्ट के कारण बढ़ते मौत के मामलों को लेकर अब स्वास्थ्य महकमा भी गंभीर हो गया है. कार्डियक अरेस्ट को लेकर आम लोगों को जागरूक करने व सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) की जानकारी देने के लिए वृहद स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल में भी स्कूली छात्रों को सीपीआर संबधित जानकारी दी जा रही है.

उत्तराखंड विषम भौगोलिक परिस्थिति वाला क्षेत्र है. यहां के दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध नहीं है. इलाज के लिए लोगों को कई किलोमीटर के चक्कर काटने पड़ते हैं. ऐसे में कई बार यहां हृदय गति रुकने व त्वरित इलाज न मिलने के कारण मौत की घटनायें सामने आती हैं. खासतौर पर चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों में हृदय गति रुकने के मामले सर्वाधिक आते हैं. ऐसे में अगर उसी समय उक्त व्यक्ति को सीपीआर दी जाये, तो जान बचाई जा सकती है.

फायर फाइटर से लेकर छात्रों को प्रशिक्षण

बेस अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अजेय विक्रम सिंह ने बताया कि सीपीआर के बारे में मेडिकल कॉलेज श्रीनगर द्वारा सबसे पहले बेस अस्पताल के मेडिकल स्टाफ, वार्ड बॉय, समेत अन्य कर्मचारियों को दी गई. इसके बाद अभियान को वृहद रूप देते हुए स्कूलों में भी सीपीआर देने का प्रशिक्षण शुरू किया गया. उनका कहना है कि सीपीआर देने का तरीका सभी को मालूम होना चाहिए, क्योंकि हृदय गति कहीं भी रुक सकती है. कहीं भी दुर्घटना या कार्डियक अरेस्ट के चलते मृत्यु हो सकती है. ऐसे में सीपीआर जीवन बचाने में एक बड़ा प्रयास हो सकता है. जिसके मद्देनजर पुलिस प्रशासन और फायर फाइटर को ट्रेनिंग दी गई. जिसके बाद श्रीनगर के 5-6 स्कूलों में भी सीपीआर के बारे में छात्रों को जानकारी दी गई और कक्षा 11 व 12 के छात्रों को सीपीआर देना सिखाया गया.

6 महीने में 5000 लोगों को दी ट्रेनिंग

उत्तराखंड एनेस्थीसिया सोसाएटी की अध्यक्ष डॉ पारूल जिंन्दल ने जानकारी देते हुए बताया कि सीपीआर को लेकर आम जनता को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. बीते 6 महीने में 25 विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा पांच हजार लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है. यह 7 अलग-अलग शहरों में प्रशिक्षिण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि हृदय गति रुकने जैसी कंडीशन में सीपीआर देकर लोगों की जान बचाई जा सकती है.

सीपीआर की फुल फॉर्म कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन होती है. सीपीआर एक इमरजेंसी लाइफ सेवर प्रक्रिया है, जिसे तब किया जाता है जब दिल धड़कना बंद कर देता है. हार्ट ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार कार्डियक अरेस्ट के बाद तत्काल सीपीआर देने से बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो सकती है. ब्लड फ्लो को एक्टिव रखना एक सफल पुनर्जीवन के अवसर को बढ़ाता है.

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FIRST PUBLISHED : November 2, 2023, 15:31 IST

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