समाज का दोहरा रवैया: मुफ्त शिक्षा से बेटी और महंगी फीस से संवार रहे बेटों का भविष्य

कोटा। जिले के सरकारी स्कूलों में लड़कों की संख्या लगातार घट रही है। वहीं, प्राइवेट स्कूलों में तेजी से बढ़ रही है। जबकि, सरकारी में लड़कियों का नामांकन बढ़ रहा तो प्राइवेट में घट गया। इसका एक मात्र कारण अभिभावकों की दोहरी मानसिकता नजर आता है। लोग अब भी बेटों को ही अच्छी सुिुवधा उपलब्ध कराने में रुचि दिखाते हैं। बेटियों को सरकारी में मुफ्त शिक्षा और बेटों को महंगी फीस देकर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। नवज्योति ने जिले के 2 हजार से ज्यादा सरकारी व प्राइवेट स्कूलों के पिछले 4 वर्षों के नामांकन का रिकॉर्ड खंगाला तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।

सरकारी के मुकाबले निजी में 3 गुना बढ़े छात्र
जिले में 1054 सरकारी स्कूल हैं। जिनमें सत्र 2020 से 2023-24 तक कक्षा 1 से 12वीं में कुल 3 लाख 9 हजार 721 छात्रों का नामांकन रहा। जबकि, 1062 प्राइवेट स्कूलों में 5 लाख 75 हजार 290 रहा। प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक सरकारी के मुकाबले प्राइवेट स्कूलों में बालकों की संख्या में तीन गुना इजाफा हुआ है। 

सरकारी स्कूलों के आंकड़े
सत्र 2020-21 
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5वीं)
छात्रों की संख्या-  31,393
छात्राओं की संख्या-  34,157
अंतर-  2,761

उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8वीं)
छात्र-    17954
छात्राएं-  20,517
अंतर-    5,563

सी.सैकंडरी (कक्षा 9 से 12वीं)
छात्र-    21,617
छात्राएं-  25,401
अंतर-    3,784

सत्र 2021-22
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5वीं)
छात्रों की संख्या-  37,417
छात्राओं की संख्या- 39,341
अंतर-  1,924

उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8वीं)
छात्रों की संख्या-  21,000     
छात्राओं की संख्या- 22,960
अंतर-  1,960

सी.सैकंडरी (कक्षा 9 से 12वीं)
छात्रों की संख्या-  24,647
छात्राओं की संख्या-  27,995
अंतर-  3,348

सत्र 2022-23
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5वीं)
छात्रों की संख्या-  32,836
छात्राओं की संख्या-  35,635
अंतर- 2,799

उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8वीं)
छात्रों की संख्या-  27,949
छात्राओं की संख्या- 30,393
अंतर- 2,444

सी. सैकंडी (कक्षा 9 से 12वीं)
छात्रों की संख्या- 23,832
छात्राओं की संख्या- 27,690
अंतर-  3,858

सत्र 2023-24
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5वीं)
छात्रों की संख्या- 28,670
छात्राओं की संख्या- 31,894
अंतर-  3,224

उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8वीं)
छात्रों की संख्या-  20,035
छात्राओं की संख्या- 22,525
अंतर-  2,490

सी. सैकंडरी (कक्षा 9 से 12वीं)
छात्रों की संख्या-  22,379
छात्राओं की संख्या-  27,321
अंतर-  4,942
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प्राइवेट स्कूलों के आंकड़े

सत्र 2020-21 
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5वीं)
छात्रों की संख्या- 74442
छात्राओं की संख्या- 59713
अंतर- 14,729

उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8वीं)
छात्रों की संख्या- 37530
छात्राओं की संख्या- 28870
अंतर- 8,660         

सी. सैकंडरी (कक्षा 9 से 12वीं)
छात्रों की संख्या- 37801
छात्राओं की संख्या- 31185
अंतर- 6,616

सत्र 2021-22
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5वीं)
छात्रों की संख्या- 68086
छात्राओं की संख्या- 55472
अंतर- 12,614

उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8वीं)
छात्रों की संख्या- 34268     
छात्राओं की संख्या- 26121
अंतर- 8,147

सी.सैकंडरी (कक्षा 9 से 12वीं)
छात्रों की संख्या- 48531
छात्राओं की संख्या- 29443
अंतर- 19,088

सत्र 2022-23
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5वीं)
छात्रों की संख्या- 70883
छात्राओं की संख्या- 57277
अंतर- 13,606

उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8वीं)
छात्रों की संख्या- 34915
छात्राओं की संख्या- 25771
अंतर- 9,144

सी. सैकंडी (कक्षा 9 से 12वीं)
छात्रों की संख्या- 53240
छात्राओं की संख्या- 30823
अंतर- 22,417

सत्र 2023-24
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5वीं)
छात्रों की संख्या-  46199
छात्राओं की संख्या- 38308
अंतर-  7,891

उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8वीं)
छात्रों की संख्या- 24807
छात्राओं की संख्या- 18355
अंतर- 6,452

सी. सैकंडरी (कक्षा 9 से 12वीं)
छात्रों की संख्या- 44588
छात्राओं की संख्या- 25878
अंतर-  18,710

सरकारी स्कूलों में बेटियां डेढ़ गुना तो निजी में बढ़ी बेटों की तादाद तिगुनी
प्राइवेट में घटी तो सरकारी में बढ़ी छात्राएं
पिछले चार सालों में राजकीय विद्यालयों में छात्राओं का नामांकन 3 लाख 45 हजार 829 रहा। जबकि, लड़कों की संख्या 3 लाख 9 हजार 721 रही। ऐसे में 36 हजार 108 लड़कियां अधिक रहीं। वहीं, प्राइवेट में जहां बालकों का नामांकन 5 लाख, 75 हजार 290 रहा, जिसके मुकाबले छात्राओं की संख्या 4 लाख 27 हजार 216 ही रहा। इस तरह निजी स्कूलों में 1 लाख 48 हजार 74 बालिकाओं की संख्या कम रही। 

जहां मौका मिला वहीं बेटों को पछाड़ रही बेटियां
शिक्षाविदें का कहना है, आधुनिक युग में भी बेटों-बेटियों की शिक्षा में भेद किया जा रहा है। अभिभावक, सरकारी स्कूलों में बेटियों को तो प्राइवेट स्कूलों में बेटों को पढ़ाने में अधिक रुचि दिखाते हैं। तमाम मुश्किलों के बावजूद बेटियों को जहां  मौका मिलता है, वहीं बेटों को पछाड़ रही है। चाहे बोर्ड हो या प्रतियोगी परीक्षा सब जगह बेटियां ही मुकाम हासिल कर रही है। इसके बाद भी बेटियों के साथ दोहरी रवैया अपनाया जा रहा है।

प्रत्येक कक्षा में 10 हजार का अंतर
सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 12वीं तक अध्ययनरत बालिकाओं की संख्या बालकों के मुकाबले दस फीसदी अधिक है। पिछले चार सालों के आंकड़े देखें तो प्रतिवर्ष प्रत्येक कक्षा में बालकों की संख्या बालिकाओं की अपेक्षा 10 हजार कम है। वर्तमान सत्र 2023-24 में जिले में सभी सरकारी स्कूलों में 81 हजार 740 लड़कियां अध्ययनरत हैं। जबकि, लड़कों का नामांकन 71 हजार 84 है। वहीं, प्राइवेट स्कूलों की बात करें तो वर्तमान सत्र में छात्रों की संख्या 1 लाख 15 हजार 594 है। जबकि, लड़कियों का नामांकन 82 हजार 541 ही है। यानी लड़कों के मुकाबले 33 हजार 53 लड़कियां कम है।

बेटियों की मेहनत, सरकारी मदद
सरकारी स्कूलों में बेटियों का नामांकन बढ़ना अच्छा संकेत है। कई सारी योजनाएं सिर्फ बालिकाओं के लिए ही होने से उनकी संख्या बढ़ी है। लोगों में बालिका शिक्षा को लेकर जागरूकता आई है। 
– तेज कंवर, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा कोटा संभाग

समाज की धारणाओं को तोड़ा बेटियों ने 
बेटियों ने समाज की धारणाओं को तोड़ते हुए अपनी प्रतिभा से यह साबित किया है कि उन्हें मौका मिले तो वे कहीं भी पीछे नहीं हैं।
– डॉ. ज्योति सिडाना, समाज शास्त्री, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज

मां-बाप की लाठी भी बन रही बेटियां
बेटियां पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर रहती हैं। बोर्ड परीक्षा ही नहीं प्रतियोगिता परीक्षाओं में भी कामयाब रहती हैं। मां-बाप के बुढ़ापे की लाठी भी अब बेटियां बन रही हैं। 
– देव शर्मा, शिक्षाविद्