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पहाड़ की आंखों देखी : खंडहर हो चुके मकान, बंजर खेत, नेपाली मजदूर
पहाड़ खाली हो रहे हैं ये तो हम हमेशा से सुनते आए हैं. पर पहाड़ों में बंजर हो चुके खेतों को देखना और खंडहर बन चुके छोड़े हुए मकानों को देखना वाकई में दर्द भरा है. उत्तराखंड (Uttarakhand Migration) के अधिकतर गांव अब कुछ दिनों के लिए होने वाली सामूहिक पूजा में ही आबाद होते हैं, सालों पहले पलायन कर गए लोग देवताओं को पूजने अपने गांव वापस आते हैं. पहाड़ में बीते यह कुछ दिन भी ‘बाहर’ से आए इन लोगों के लिए मुश्किल होते हैं, वहां के मुश्किल जीवन का सामना करने के लिए वह नेपाली मजदूरों पर ... Read more
दून के इन टॉप 5 स्कूलों में पढ़ते हैं वीवीआईपी के बच्चे, हर साल देते हैं इतने लाख फीस
01 द दून स्कूल : देश के मशहूर प्रतिष्ठित स्कूलों में शुमार “द दून स्कूल ” में एडमिशन लेने का हर किसी का सपना होता है. देश की जानी-मानी हस्तियों ने इस स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है. द दून एक बॉयज बोर्डिंग स्कूल है जहां देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, संजय गांधी, पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, कलाकार अनीश कपूर, वरिष्ठ पत्रकार करन थापर, अभिनव बिंद्रा, एनडीटीवी के संस्थापक प्रणव राय जैसे बड़े लोगों ने शिक्षा हासिल की है. इस स्कूल की स्थापना साल 1935 में कई गई थी. इस स्कूल ... Read more
उत्तराखंड की ‘पिरूल वुमेन’ को पीएमओ ऑफिस से आई चिट्ठी! प्रधानमंत्री मोदी को भेजी थी राखी
हिना आज़मी/ देहरादून. उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में तकरीबन 500 से 2200 मीटर की ऊंचाई पर चीड़ के पेड़ पाए जाते हैं. जिनकी पत्तियों को पिरूल कहा जाता है. इन्हें पहाड़ी इलाकों के लिए अभिशाप माना जाता है क्योंकि यह पत्तियां वनाग्नि का मुख्य कारण मानी जाती है. चीड़ की यह नुकीली पत्तियां जनवरी के महीने से ही जंगल में चादर की तरह बिछ जाती हैं और तापमान बढ़ते ही यह धधकने लगती हैं.जंगल को दहकाने वाली इन पत्तियों से महिलाओं का रोजगार लहलहाने लगा है. क्या आप यकीन कर पाएंगे कि इन पत्तियों से कोई खूबसूरत आभूषण और ... Read more
इंजीनियर की नौकरी छोड़ शुरू किया ये बिजनेस, अब पापा को है बेटे पर नाज, दिलचस्प है कहानी
हिना आज़मी/देहरादून. नए जमाने में फैशन के साथ-साथ जेवरों में भी नई ज्वेलरी आती रहती है, लेकिन राजा-महाराजाओं के जमाने से ही लोगों में बीड्स ज्वेलरी का अपना अलग ही शौक रहा है. जो आज भी कायम है. बीड्स ज्वेलरी या कहें मोतियों के जेवर का पुराने जमाने में बहुत चलन था. लेकिन नए स्टाइल के जेवर आने से इनकी डिमांड कम होने लगी. वहीं इन जेवरों को नए स्टाइल के साथ पेश करने का काम कर रहे हैं आदिल अख्तर. यह काम उनके परिवार में पिछले 30 सालों से हो रहा था और बचपन से ही वह स्कूल कॉलेज ... Read more
देहरादून का सबसे सस्ता और सुरक्षित हॉस्टल, यहां लाइब्रेरी और जिम भी
हिना आज़मी/ देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को एजुकेशन हब कहा जाता है क्योंकि न सिर्फ राज्य के लगभग सभी जिलों से बल्कि अन्य राज्यों से भी लोग पढ़ाई करने के लिए यहां आते हैं. वहीं राजधानी में रहकर नौकरी करने वालों की संख्या भी कुछ कम नहीं है. पढ़ाई या नौकरी करने वाली लड़कियां/महिलाएं अगरदेहरादून (Girls Hostel in Dehradun) में अच्छा हॉस्टल चाहती हैं, तो तीलू रौतेली छात्रावास बेहद ही किफायती है क्योंकि यहां रहने-खाने के लिए सिर्फ 7100 रुपये प्रति माह देने होते हैं. इसमें आपको ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर मिलता है. जो लड़कियां आर्थिक रूप से कमजोर ... Read more
Diwali 2023: दीवाली को खास बना देंगे ये गिफ्ट हैंपर्स, जानें यहां क्या-क्या मिल रहा खास
हिना आज़मी/देहरादून. आज के समय में हर कोई अपनी बिजी लाइफ में बहुत व्यस्त रहता है. आजकल लगभग सभी लोग नौकरी करते हैं लेकिन जो लोग नहीं भी करते हैं उनके पास भी इतना वक्त नहीं होता है कि वह परिवार वालों के साथ या दोस्तों, रिश्तेदारों से मिलकर उनके साथ कुछ वक्त बिता सकें. हालांकि, दीवाली एक ऐसा त्योहार है, जो लोगों को करीब लाने के साथ ही रिश्तों में प्यार भी बढ़ाता है. दीवाली में हर कोई शॉपिंग करता है और अपने बजट के मुताबिक एक दूसरे के लिए मिठाई और गिफ्ट्स लेता है. अगर इस मौके पर ... Read more
500 साल पुराना है रम्माण नृत्य…18 तालों में पूरी होती है रामायण, जानें क्या है ‘मुखौटा नृत्य’
सोनिया मिश्रा//चमोली. देवभूमि उत्तराखंड ने सदियों से लोक संस्कृति, लोककलाओं, लोकगाथाओं को संजोकर रखा है और यही बात इसे दूसरों से अलग बनाती है. ऐसी ही एक लोक संस्कृति है रम्माण, जिसने देवभूमि के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र से विश्व सांस्कृतिक धरोहर में अपना स्थान बनाया है. साथ ही जिसने आज भी अपने 500 वर्षों के इतिहास को संजोकर रखा है. चमोली जिले के दूरस्थ विकासखंड जोशीमठ में प्रत्येक वर्ष रम्माण उत्सव का धूमधाम से आयोजित किया जाता है. इसमें रामायण से संबंधित विभिन्न विधाओं की ढोल दमाऊ की 18 तालों में प्रस्तुति की जाती है. इसे ‘मुखौटा नृत्य’ भी ... Read more
देहरादून में पहली बार हो रहा क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल, एक मंच पर दिखेंगे ये दिग्गज
रिपोर्ट- हिना आज़मी/ देहरादून.ठगी से लेकर डकैती, मर्डर और साइबर अपराधों की खबरों से अखबार भरे पड़े होते हैं. बच्चों और युवाओं को इन अपराधों के बारे में समझाने के लिए लोग नए-नए तरीके अपनाते हैं. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पहली बार क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन होने जा रहा है. देहरादून के जाने माने स्कूल वेल्हम बॉयज में 3 नवम्बर से यह शुरू होगा, जिसमें अपराध से जुड़ी कहानियों को रोचक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे स्टूडेंट को अपराध से जुड़ी घटनाओं की जानकारी और सावधानियां बताए जाएंगी. उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि देहरादून ... Read more
3 साल बाद दिखेगा बैकुंठ चतुर्दशी मेले का वैभव, इस तारीख से होगी शुरुआत
कमल पिमोली/ श्रीनगर गढ़वाल.उत्तराखंड अपनी सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, यहां के स्थानीय मेलों में देवभूमि की संस्कृति देखने को मिलती है. नवरात्रों के बाद से ही गढ़वाल क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में मेलो का आयोजन होता है, इनमें से कई ऐसे पौराणिक मेले हैं जिन्हें वापस जीवंत करने का प्रयास किये जा रहे हैं. ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के लिए पूरे गढ़वाल क्षेत्र में पहचाने जाने वाला बैकुंठ चतुर्दशी मेले का खोया हुआ वैभव वापस लौटने वाला है. लम्बे समय के बाद इस वर्ष बैकुंठ चतुर्दशी मेला धूमधाम के साथ आयोजित किया जायेगा. मेले के आयोजन को ... Read more
कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए फ्री वात्सल्य डे केयर सेंटर, मिलता है मां जैसा दुलार
हिना आज़मी/देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वह कामकाजी महिलाएं जिनके घर में उनके छोटे बच्चों को संभालने के लिए कोई नहीं होता है, उनके लिए देहरादून के सर्वे चौक पर वात्सल्य डे केयर सेंटर स्थित है जहां 6 साल तक कि उम्र के बच्चों को रखा जाता है. यहां बच्चों के खेलने के लिए खिलौने ,झूले और सोने के लिए बेड भी लगाए गए हैं तो वही बच्चों के खाने के लिए भी कुछ ना कुछ बना कर दिया जाता है. वात्सल्य डे केयर सेंटर की एचओडी रिद्धि भारद्वाज ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि ऐसी ... Read more