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प्रशासनिक अनदेखी के चलते 5 दिन में मैरिज गार्डन में दूसरा हादसा, एक की हुई मौत

बून्दी। टोंक के टोडारायसिंह के एक परिवार में शादी की खुशियां उस समय काफ ूर हो गई, जब बून्दी शहर के नैंनवां रोड़ के इंडस्ट्रीयल एरिया में संचालित शहनाई मैरिज गार्डन में बुधवार सुबह 6 बजे आग लगने की घटना में दुल्हनों के दादा की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार मैरिज गार्डन में लगे एक सफारी टेंट के एसी में शॉर्ट सर्किट और एसी का कंप्रेसर फ ट जाने यह हादसा  हुआ, जिसमें दुल्हनों के दादा की मौत ने न केवल परिवार में शादी की खुशियों को मातम में बदल दियाए वहीं दुल्हनों को पूरे जीवन भर न भूलाने ... Read more

डाबी में जगह-जगह हो रहा अतिक्रमण

डाबी। डाबी ग्राम पंचायत क्षेत्र में जगह-जगह अतिक्रमण हो रहा है। सरकारी पटवार घर पंचायत के सामने बने पुराने सरकारी अस्पताल, स्कूल के चौक सार्वजनिक चौराहे सहित गांव के मुख्य मार्ग अतिक्रमण की चपेट में है। जिस पर जिला प्रशासन व ग्राम पंचायत की उदासीनता की वजह से अभी तक अतिकर्मियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होने से ग्रामीणों में जिला प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी जताई है। स्थानीय खुशीराम बैरागी का कहना है कि डाबी मेन चौराहे पर पटवार घर बना है जिसे लोगों ने खुर्द बुर्द कर दिया है। पटवार घर के सामने दुकान लगाने वाले आए दिन ... Read more

20 साल से एलएलएम को तरस रहा कोटा संभाग

कोटा। हाड़ौती के राजकीय विधि महाविद्यालय बरसों से सरकारी तंत्र की लापरवाही का दंश झेल रहे हैं। जिसका खामियाजा सैंकड़ों विद्यार्थी भुगत रहे हैं। संभाग में तीन गवर्नमेंट लॉ कॉलेज हैं, जो पिछले 20 साल से एलएलएम को तरस रहे हैं। हालात यह हैं, सभी कॉलेज यूजी हैं लेकिन पीजी एक में भी नहीं है। जिसकी वजह से भावी वकील कानूनी शिक्षा में स्पेशलाइजेशन नहीं कर पा रहे। वहीं, पीजी के अभाव में रिसर्च सेंटर तक नहीं खुल पाए। ऐसे परिवेश में क्वालिटी एजुकेशन तो छोड़िए कानून की बारीकियां तक सीखने को नहीं मिलती। निजी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में महंगी ... Read more

घटिया सिस्टम से जी का जंजाल बना सेमेस्टर

कोटा। उच्च शिक्षा में जिस उद्देश्य के साथ राष्टÑीय शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई वो सरकारी मशीनरी की लचरता से पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा। विद्यार्थियों के सर्वागिण विकास की मंशा से न्यू एजुकेशन पॉलीसी लागू की गई, जो कॉलेज आयुक्तालय की लापरवाही के भंवर में ऐसी फंसी जिसके एक साल बाद भी सकारात्मक परिणाम नजर नहीं आए। हालात यह हैं, राजकीय  महाविद्यालयों में पढ़ाने को शिक्षक नहीं है तो यहां विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन कैसे मिलेगी। वहीं, राजसेस से संचालित कॉलेज 6 बाद सूने हो जाएंगे। ऐसे में सैकंड सेमेस्टर और स्टूडेंट्स मझधार में ... Read more