Category: उत्तराखंड

पिथौरागढ़ जिले के सरकारी स्कूलों में सिर्फ 13 प्रधानाचार्य, इन विकासखंडों में अब बाबू संभालेंगे स्कूल की कमान

हिमांशु जोशी/ पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सरकारी स्कूलों की हालत समय के साथ खस्ताहाल होते जा रही है. शिक्षकों को कमी से लगातार सरकारी स्कूलों से जनता का मोहभंग हो रहा है, जिसका असर यह हुआ है कि पहाड़ के अधिकांश दूरदराज वाले इलाकों में छात्र संख्या 10 से कम और कई जगह तो शून्य हो गई है. शिक्षा महकमा सरकारी स्कूलों की स्थिति को सुधारने के लिए अभी तक कोई ठोस नीति नहीं बना सका है. हालात तो यह है कि स्कूल में सबसे महत्वपूर्ण पद प्रधानाचार्य का होता है, जिसका पिथौरागढ़ जिले में काफी टोटा है. ... Read more

पहाड़ की महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं ‘बैणी’ रिद्धि, क्रोशिया को बनाया जरिया

तनुज पाण्डे/ नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल की रहने वालीं रिद्धि ने एक अनोखी राह थामी है. एक ओर जहां इस उम्र में युवा प्रतिष्ठित नौकरी के लिए काम कर रहे हैं, वहीं रिद्धि ने ग्रामीण महिलाओं को क्रोशिया का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की ठानी है. बाकायदा इसके लिए उन्होंने शहर के चकाचौंध भरे जीवन को छोड़कर गांव के परिवेश को अपनाया. वह नैनीताल शहर की निकटवर्ती ग्रामसभा पंगोट मेंशिफ्ट होकर वहां की महिलाओं के साथ स्वरोजगार कर रही हैं. उन्होंने बताया कि वह महिलाओं को क्रोशिया से खूबसूरत स्वेटर, खिलौने, फूल, बैग्स आदि बनाना सिखाकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित ... Read more

पहाड़ की बेटी के पहाड़ से हौसले! गुरू के कहने पर उठाया कदम, जानें कैसे ‘ढोल गर्ल’ बनीं वर्षा बंडवाल

सोनिया मिश्रा/चमोली. देवभूमि उत्तराखंड में कई प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्होंने कई सामाजिक वर्जना को तोड़ कर नई कहानी का अध्याय शुरू किया है. उन्हीं में से एक हैं वर्षा बंडवाल, जिन्होंने अपने गुरु के मार्गदर्शन में रहकर ढोल सीखना शुरू किया और आज पुरुषों पर ढोल के एकाधिकार को खत्म कर वह तमाम महिलाओं के लिए मिसाल बन गईं. साथ ही आज उन्होंने अपनी पहचान ‘ढोल गर्ल’ के रूप में बनाई है. चमोली जिले के पीपलकोटी गडोरा गांव की रहने वालीं वर्षा बंडवाल के ढोल बजाने की कला हर किसी को मंत्र मुग्ध कर देती है. ढोल पर वर्षा की ... Read more

खेती-किसानी वाला ये गांव आज बन गया एजुकेशन हब, इसके फायदे भी और नुकसान भी

अरशद खान/ देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सहसपुर विधानसभा का एक छोटा सा गांव पौंधा (Pondha Village Dehradun) देश-विदेशों तक एजुकेशन हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. यूं तो किसी जमाने में यहां के खेतों में गेहूं, धान और मंडुवे की फसल लहलहाती थी, लेकिन अब इन खेतों में स्कूल-कॉलेजों की इमारतें नजर आती हैं. स्कूल और कॉलेजों के निर्माण ने यहां के परिवेश व पर्यावरण को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है. यहां के ग्रामीणों का परिवेश इतनी तेजी से बदला है कि अब ये लोग खेती किसानी छोड़कर व्यवसायी बन गए हैं. ग्रामीणों ... Read more

उत्तराखंड की ‘पिरूल वुमेन’ को पीएमओ ऑफिस से आई चिट्ठी! प्रधानमंत्री मोदी को भेजी थी राखी

हिना आज़मी/ देहरादून. उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में तकरीबन 500 से 2200 मीटर की ऊंचाई पर चीड़ के पेड़ पाए जाते हैं. जिनकी पत्तियों को पिरूल कहा जाता है. इन्हें पहाड़ी इलाकों के लिए अभिशाप माना जाता है क्योंकि यह पत्तियां वनाग्नि का मुख्य कारण मानी जाती है. चीड़ की यह नुकीली पत्तियां जनवरी के महीने से ही जंगल में चादर की तरह बिछ जाती हैं और तापमान बढ़ते ही यह धधकने लगती हैं.जंगल को दहकाने वाली इन पत्तियों से महिलाओं का रोजगार लहलहाने लगा है. क्या आप यकीन कर पाएंगे कि इन पत्तियों से कोई खूबसूरत आभूषण और ... Read more

पिथौरागढ़ में बंद हुआ 123 साल ये पुराना स्कूल, ग्रामीणों ने फिर से खुलवाया

हिमांशु जोशी/ पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में स्थित गांवों से पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा है. वजह है कि आज तक राज्य के पहाड़ी जिलों के गांवों में मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं. एक तरफ जहां पूरा देश समय के साथ तरक्की कर रहा है, वहीं उत्तराखंड के ग्रामीण इलाके ठीक इसके विपरीत बदहाल होते जा रहे हैं. किसी भी क्षेत्र में विकास के लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार महत्वपूर्ण है लेकिन इसमें सबसे जरूरी चीज है शिक्षा, जो इस आधुनिकता के दौर में सबसे जरूरी है. अब उत्तराखंड में विडंबना यह है कि यहां ... Read more

उत्तराखंड में एक ऐसा होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, जहां 15 साल से प्रिंसिपल ही नहीं!

रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा. किसी भी स्कूल-कॉलेज या अन्य इंस्टीट्यूट में प्रिंसिपल का होना अनिवार्य होता है, पर उत्तराखंड के अल्मोड़ा में एक ऐसा संस्थान भी है, जहां पर करीब 15 साल से प्रिंसिपल की तैनाती नहीं हो पाई है. इस इंस्टीट्यूट के बच्चे और टीचर आज भी प्रिंसिपल की राह देख रहे हैं. खाली कुर्सी और बंद दरवाजे को देखकर छात्र और टीचर मायूस लौट जाते हैं. यहां का चार्ज प्रशासन को दिया गया है और वर्तमान में एसडीएम के पास कार्यभार है. हम बात कर रहे हैं जगत सिंह बिष्ट राजकीय होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की. इसकी स्थापना 1991 में ... Read more

गढ़वाल यूनिवर्सिटी के 50 साल पूरे, आंदोलनों के दम पर बना था विश्वविद्यालय

कमल पिमोली/ श्रीनगर गढ़वाल. उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल में स्थापित गढ़वाल विश्वविद्यालय (Garhwal University Uttarakhand) 50 साल का हो गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन 50 साल के स्वर्णिम इतिहास के साथ गोल्डन जुबली मना रहा है.इसकी स्थापना 1 दिसंबर 1973 को हुई थी, लेकिन गढ़वाल विश्वविद्यालय का बनना कोई आसान नहीं था. इसके लिए कई आंदोलन हुए, आंदोलनकारी जेल गए, तब जाकर गढ़वाल विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया. इन 50 वर्षों के स्वर्णिम इतिहास को याद करते हुए चौरास परिसर के स्वामी मन्मथन प्रेक्षागृह में समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए हुए आंदोलन में अहम भूमिका निभाने ... Read more

Winter Vacation: सर्दियों में एडवेंचर का तड़का! सस्पेंशन ब्रिज, वैली क्रॉसिंग और स्काई वॉक स्पोर्ट का लें मजा

अरशद खान/देहरादून: राजधानी देहरादून करीब स्थित मशहूर पर्यटक स्थल धनोल्टी से 16 किलोमीटर की दूरी पर इंक्रेडिबल एडवेंचर पार्क स्थित है. यहां पर 9 से ज्यादा प्रकार के एडवेंचर पर्यटकों को कराए जाते हैं. जिनमें स्काई साइकिलिंग, वैली क्रॉसिंग, नेट क्लाइंबिंग, स्काई वॉक, जिप लाइन, सस्पेंशन ब्रिज, जंगल सफारी शामिल है. इंक्रेडिबल एडवेंचर में ₹250 से एडवेंचर एक्टिविटी शुरू होती है. इसके अलावा ₹800, 1200, 1500, 2000 और ₹2500 के कोंबो पैक भी पर्यटकों के लिए यहां मौजूद हैं. इस जगह को काणाखाल कहा जाता है और यह क्षेत्र पूर्ण रूप से साहसिक खेलों के लिए ही जाना जाता है. ... Read more